पादपों और जंतुओं का आर्थिक महत्व - NV STUDY SUPPORT

शनिवार, 6 जून 2026

पादपों और जंतुओं का आर्थिक महत्व

पादपों और जंतुओं का आर्थिक महत्व

यह टॉपिक मुख्यतः डेटा आधारित है, जिसमें हमें विभिन्न पादपों और जंतुओं के आर्थिक महत्व, उनके वैज्ञानिक नाम, उपयोग तथा विशेषताएं याद करनी होती हैं। इसे समझने में ज्यादा प्रक्रियात्मक ज्ञान की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सही कंटेंट को याद करना जरूरी है।

पादपों का आर्थिक महत्व

पादपों की श्रेणियां और उपयोग

  • खाद्यान्न फसलें (सीरियल्स): हमें रोजाना भोजन के लिए अनाज जैसे चावल, गेहूं, बाजरा, ज्वार, जौ इत्यादि मिलते हैं।
  • दलहन (पल्ससेस): जैसे मूंग, उड़द, अरहर, चना, मसूर जो प्रोटीन के स्रोत हैं।
  • तिलहन (ऑयलसीड): जिनसे तेल प्राप्त होता है जैसे तिल, सरसों, मूंगफली।
  • रेशे प्रदान करने वाले पादप: जैसे कपास (कोटन), जूट, सणई, नारियल का कोयर।
  • मेडिकल उपयोग वाले पादप: तुलसी, नीम, सर्पगंधा, अश्वगंधा आदि।
  • फलों और सब्ज़ियों के प्लांट्स: आम, केला, संतरा, टमाटर, मिर्ची इत्यादि।
  • मसाले प्रदान करने वाले पादप: काली मिर्च, इलायची, हल्दी, सौंफ, हींग, दालचीनी, लौंग।
  • शुगर प्रदान करने वाले पौधे: गन्ना, चुकंदर।
  • पेय पदार्थ देने वाले पादप: चाय, कॉफ़ी।
  • लकड़ी प्रदान करने वाले पौधे: शीशम, सागवान, कड़िया (अखरोट), विलो।

प्रमुख खाद्यान्न फसलों के वैज्ञानिक नाम और विशेषताएं

पादप वैज्ञानिक नाम विशेषताएं और उपयोग
चावल (अनाजों का राजा) Oryza sativa स्टार्च और विटामिन B का स्रोत। फर्स्ट सुपरफाइन बायोटेक वैरायटी: पूसा 1460। सुनहरा चावल (Golden Rice) विटामिन A से समृद्ध। उत्पादन में प्रथम स्थान चीन, भारत दूसरे स्थान पर।
गेहूं Triticum aestivum हरित क्रांति पर विशेष प्रभाव। सूजी के लिए। ग्लूटेन प्रोटीन, जेंथोफिल पिगमेंट। सिलियक रोग में ग्लूटेन से एलर्जी।
मक्का Zea mays C4 पौधा, भुट्टा नर पुष्पक्रम है, पॉपकॉर्न का स्रोत। अनाजों की रानी। प्रमुख प्रजातियां: सोना, अम्बा, जवाहर इत्यादि।
बाजरा Pennisetum americanum शुष्क क्षेत्रों में प्रमुख अनाज। ग्रीन ऐयर डिजीज (फंगल). उत्पत्ति: दक्षिण अफ्रीका।
जौ Hordeum vulgare शराब निर्माण में उपयोग। प्रमुख किस्में: रज किरण और आर ओ 387। लोकल रूप से मलेरिया रोग संवेदनशील।
ज्वार Sorghum bicolor मोटे अनाजों का राजा, शराब निर्माण में उपयोग। अमीनो एसिड ल्यूसिन मौजूद, ज्यादा सेवन से पैलेग्रा रोग हो सकता है। जहरीला हाइड्रोसाइनिक एसिड।
ओट्स Avena sativa बीटा ग्लूकेन से भरपूर, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाला और भूख नियंत्रित करने वाला। फिटनेस फ्रीक के लिए उपयोगी।
मंडुआ (रागी) Eleusine coracana पहाड़ी क्षेत्रों में प्रमुख भोजन, डायबिटीज उपचार में सहायक।

तेल प्राप्त करने वाले पादप (तिलहन)

तेल के स्रोत दो प्रकार के होते हैं - वाष्पशील (वोलेटाइल) और अवाष्पशील (नॉन वोलेटाइल/वसीय तेल)

तेल का प्रकार प्रमुख स्रोत उपयोग और विशेषताएं
वाष्पशील (वेपरेबल) गुलाब, चमेली, चंपा (फूल)
खस (जड़)
चंदन, देवदार, कपूर (लकड़ी)
लौंग (फूल कलिका)
सुगंध के लिए उपयोग, फ्लोरल पार्ट से प्राप्त। एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन के कारण खुशबू। परफ्यूम, अनुष्ठान, सौंदर्य प्रसाधन।
अवाष्पशील (वसीय तेल) शुष्कन तेल: अलसी, कुसुम, सोयाबीन
आंशिक शुष्क तेल: तिल, सरसों, सूरजमुखी
अशुष्क तेल: मूंगफली, अरंडी, जैतून
खाने-पीने, पेंटिंग, साबुन निर्माण, सौंदर्यकृत तेल, खाद्य तेल। सूखने वाले, आंशिक सूखने वाले, गैर सूखने वाले वर्गीकरण।

दलहन (पल्ससेस) का महत्व

दलहन पौधे जिन्हें लेग्यूम भी कहा जाता है, नाइट्रोजन फिक्सेशन करके मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं। प्रमुख पल्ससेस और उनके वैज्ञानिक नाम नीचे दिए गए हैं:

  • मूंग: Vigna radiata
  • उड़द दाल: Vigna mungo
  • अरहर (तुअर): Cajanus cajan
  • चना: Cicer arietinum
  • मसूर: Lens culinaris
  • सोयाबीन: Glycine max

दलहन से हमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन मिलता है। भारत उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।

फल, सब्ज़ियाँ और मसाले

फल के वैज्ञानिक नाम एवं विशेषताएँ

  • आम: Mangifera indica
  • गन्ना: Saccharum officinarum
  • अंगूर: Vitis vinifera
  • सेब: Malus pumila
  • नाशपाती: Pyrus communis
  • केला: Musa paradisiaca
  • जामुन: Syzygium cumini
  • संतरा: Citrus sinensis
  • पपीता: Carica papaya
  • अनानास: Ananas comosus

मसालों के वैज्ञानिक नाम और उपयोग

मसाला वैज्ञानिक नाम विशेष उपयोग
अदरक Zingiber officinale पेट दर्द में उपयोग, सोंठ के लिए मूल पदार्थ।
हल्दी (टर्मरिक) Curcuma longa घाव भरने में सहायक, रोली बनाना।
सौंफ Foeniculum vulgare माउथ फ्रेशनर, पेट दर्द में लाभकारी।
दालचीनी (सिनेमोन) Cinnamomum zeylanicum उल्टी रोकने में सहायक, छाल से प्राप्त।
लौंग Syzygium aromaticum पुष्पकलिका से प्राप्त।
काली मिर्च Piper nigrum मसाले का राजा।
इलायची Elettaria cardamomum मसाले की रानी।
अजवायन Trachyspermum ammi पाचन में सहायक।
हींग Ferula asafoetida पाचन में उपयोगी।

औषधीय महत्व वाले पादप

  • नीम (Azadirachta indica): मच्छर नाशक, एंटीमाइक्रोबियल, स्किन रोगों में उपयोग।
  • तुलसी (Ocimum sanctum): एयर प्यूरीफायर, खांसी में सहायक।
  • सर्पगंधा (Rauwolfia serpentina): हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में रेसरपिन।
  • अश्वगंधा (Withania somnifera): कोलेस्ट्रॉल कम करने और मांसपेशियों को मजबूत करने में।
  • गुग्गल (Commiphora wightii): कोलेस्ट्रॉल कम करने में लैटेक्स का उपयोग।
  • मुलैठी (Glycyrrhiza glabra): गले की खराश में जड़ और तने का उपयोग।
  • सकोना (Cinchona): छाल से कुणैन और क्लोरोक्वीन, मलेरिया उपचार।
  • अफीम (Papaver somniferum): मॉर्फिन, कोडीन आदि नशीले पदार्थों का स्रोत।
  • भांग (Cannabis sativa): गांजा, चरस, हशीष आदि के स्रोत।

शर्करा (शुगर) प्राप्त करने वाले पादप

  • गन्ना (Saccharum officinarum): शर्करा तने से प्राप्त होती है। मोलासिस से शराब बनती है।
  • चुकंदर (Beta vulgaris): शुगर जड़ से प्राप्त। बीटेनिन नामक एल्कलॉइड होता है।

रेशे (फाइबर) उपलब्ध कराने वाले पादप

  • कपास (Gossypium species): फाइबर फूल के बड़ से प्राप्त। सेलुलोज़ का पॉलीमर।
  • जूट (Corchorus olitorius): तने से प्राप्त।
  • सणई (Linum usitatissimum): तने से फाइबर।
  • नारियल (Cocos nucifera): मेजोकार्प से कोयर रेशा प्राप्त।
  • मूंज (Saccharum munja): पत्ती और तने से रेशा।

एनिमल्स का आर्थिक महत्व (जंतुओं का उपयोग)

कृषि और पशुपालन के साथ-साथ जंतु पालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन भी आर्थिक समृद्धि के लिए आवश्यक हैं। पशु पालन से हमें दूध, मांस, ऊन, अंडे, घी तथा खाद प्राप्त होते हैं। इसके अतिरिक्त जंतुओं से हमें माल, मोती, रेशम, लाख आदि भी प्राप्त होते हैं।

मत्स्य पालन (फिशरी)

मत्स्य पालन में कृत्रिम साधनों से मछलियों का उत्पादन किया जाता है। भारत दुनियाभर में समुद्री और ताजे पानी की मछलियों के उत्पादन में छठे स्थान पर है।

मछली का प्रकार प्रमुख प्रजातियां विशेषताएं
समुद्री (मैरीने) मैक्रेल, सारडाइन, ट्यूना खारे पानी में पाई जाती हैं। कॉड लीवर तेल विटामिन ए और डी स्रोत।
ताजे पानी की देसी मछलियां रोहू, कतला, मृगला भारत में सबसे लोकप्रिय, डाइजेस्ट में सरल।
विदेशी प्रजातियां कॉमन कॉर्प (Cyprinus carpio) मच्छर नियंत्रण में उपयोगी।

बीज मछली: छोटी मछलियां जिन्हें फिश सिड कहते हैं। जल्दी पनपने पर फिंगरलेट कहेंगे।

मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर)

  • मधुमक्खी कॉलोनी में तीन प्रकार की मधुमक्खियां होती हैं: रानी, नर (ड्रोन), श्रमिक (लेबर)
  • रानी अत्याधिक चमकीली, बड़ी और एकमात्र होती है जो अंडे देती है।
  • नर मधुमक्खी का काम रानी का गर्भाधान करना होता है।
  • श्रमिक मक्खियां छत्ता बनाती हैं, फूलों से रस लेती हैं और अण्डों की देखभाल करती हैं।
  • मधुमक्खी भास्कर डांस द्वारा संवाद करती हैं।
  • मधुमक्खी का लार्वा मैगट कहलाता है।
  • शहद में फल सल Zucker
  • शहद एंटीबैक्टीरियल, घाव भरने में सहायक, हाइपरस्मोटिक एजेंट होता है।

रेशम कीट पालन (सेरीकल्चर)

  • प्रमुख रेशम कीट: बॉम्बिक्स मोराई जो शहतूत की पत्तियों पर रहता है।
  • रंगीन रेशम का धागा प्रोटीन (सेरिसिन और फाइब्रोइन) से बनता है।
  • कीट जीवन चक्र: अंडा → लार्वा (कैटरपिलर) → प्यूपा (कोकून) → प्रौढ़ (कीट)।
  • कोकून से रेशम निकालने की प्रक्रिया: स्टिफलिंग और रीलिंग।
  • प्रमुख रोग: पेब्राइन।

लाख कीट

  • वैज्ञानिक नाम: Lascer lacca एवं Tachardia lacca
  • इनसे प्राप्त लाख का उपयोग पॉलिश, चमड़ा, और चूड़ियों में किया जाता है।
  • लाख कीत मादा से प्राप्त होता है, वार्निश बनाना इसका मुख्य कार्य।
  • भारत में इण्डियन लाख अनुसंधान केंद्र-रांची।

कचुआ (Earthworm)

  • किसान का मित्र, नेचुरल प्लोअर। मिट्टी की नमी बरकरार रखता है।
  • वर्मी कल्चर (कचुआ खेती) बायोफर्टिलाइजर का स्रोत।
  • वर्मी कंपोस्ट मिट्टी fertiltiy बढ़ाता है, गंधहीन और पर्यावरण के अनुकूल।

मोती (पर्ल)

  • सॉफ्ट टिश्यू वाले मोलस्का जीवों (विशेषकर ओएस्टर/सीपी) द्वारा कैल्शियम कार्बोनेट (अरैगोनाइट) डालकर निर्मित।
  • मोती में कॉन्चियोलिन नामक प्रोटीन भी पाया जाता है।
  • प्राकृतिक विधि से बनते हैं, जापानी तकनीक उन्नत।
  • भारत में वैरायटी पिंक टाटा प्रसिद्ध।

पशुपालन एवं पोल्ट्री फार्मिंग

  • पशु पालन: गाय, भैंस, बकरी, भेड़ से दूध, घी, ऊन, गोबर उपलब्ध।
  • वैज्ञानिक नाम: गाय - Bos indicus, भैंस - Bubalus bubalis, बकरी - Capra hircus।
  • पोल्ट्री फार्मिंग में प्रमुख: मुर्गी (Gallus domesticus)।
  • मुर्गी पालन के लिए देसी और विदेशी नस्लें महत्वपूर्ण हैं।
  • अंडे देने वाली नस्ल: White Leghorn, मांस देने वाली नस्ल: Aseel, White Cornish।
  • प्रमुख रोग: रानीखेत (वायरल बीमारी)।

महत्वपूर्ण अवधारणाएँ और योगात्मक नोट्स

  • फोटोट्रॉपिज्म: जैसे सूरजमुखी अपने फूल को सूर्य की दिशा में मोड़ती है, यह क्रिया ऑक्सिन हार्मोन से नियंत्रित होती है।
  • पार्थेनोकार्पी: बिना निषेचन फल बनना। केला, अंगूर, बिना बीज वाले तरबूज इसका उदाहरण हैं।
  • प्रकाश संश्लेषण और श्वसन: दिन में पेड़ प्रकाश संश्लेषण कर ऑक्सीजन छोड़ते हैं, रात में श्वसन के कारण CO2 छोड़ते हैं।
  • सिलियक रोग: गेहूं और अनाजों में ग्लूटेन से एलर्जी वाले व्यक्तियों को ग्लूटेन मुक्त आहार लेना चाहिए।
  • नीली क्रांति: मत्स्य पालन क्षेत्र में क्रांतिकारी प्रगति।
  • हरित क्रांति: गेहूं, चावल उत्पादन में उन्नति।

प्रस्तुत नोट्स गहन अनुसंधान एवं परीक्षा-उन्मुख दृष्टिकोण के आधार पर तैयार किये गए हैं ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में सर्वोत्कृष्ट सफलता सुनिश्चित हो सके।

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